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दीपावली पर निबंध | Essay On Deepawali In Hindi 2019


deepawali essay 2019 in hindi


सभी पाठकों को दीपों के त्यौहार दीपवाली की हार्दिक बधाई... आपका जीवन खुशियों से भरा रहे, सुख-समृद्धि आपके द्वार रहे......
 
दोस्तो हमारा देश पर्व और त्योहारों का देश है । यहा पर Everyday कोई न कोई Festival जरूर Celebrate किया जाता है।
Friends Festival हमारे मन मे उमंग और उत्साह का संचार करते है। India मे हिन्दू हो या मुसलमान या जैन सभी धर्म के उत्सव हर्षोल्लास से मनाते है ।
होली, दीपावली, रक्षाबंधन, आखातीज, करवा चौथ, कजली तीज, जन्माष्टमी, गणगौर आदि हिन्दुओ के प्रमुख त्योहार है । इनके अलावा भी बहुत से Festival Celebrate किए जाते है ।
दीपावली हिन्दुओ की Most festival है । आज हम दीपावली पर सम्पूर्ण जानकारी देगे।

deepawali kyu manate hai


दीपावली पर निबंध 

     In This Post
1. दीपावली क्यों मनाई जाती है? Diwali Kyo Manate Ha?
2. दीपावली कब मनाई जाती है? When Diwali Celebrate?
3. दीपावली कैसे मानते है? How To Celebrate Diwali?
4. दीपावली का महत्व।


1. दीपावली क्यों मनाई जाती है? Diwali Kyo Manate Hai?

      Friends कई लोगो के मन मे questions होगा कि दिवाली क्यों मनाई जाती है ? तो आपके सवाल का जवाब अब मिल जाएगा।
दिवाली मनाने के पीछे एक बहुत बडा कारण है ।
दिवाली क्यों मनाते है?
      रामायण काल की बात है । जब प्रभु श्रीराम लंका नरेश रावण का वध करके और 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके जब अयोध्या वापिस लौटे थे तब अयोध्या वासियों से खुशी से पुरे अयोध्या नगर को दीपक से सजा दिया । और चारो दीपक ही दीपक थे और उनका प्रकाश से पुरा नगर जगमगा गया। इस कारण हम इस को दीपावली या दिवाली कहते है।

   भगवान श्रीराम के पिता के दिए वचन निभाने के लिए 14 वर्ष का वन मे व्यतीत किए वो हमारे सामने पितृभक्ति का अनूठा उदाहरण है । श्री राम के अयोध्या लौटने की खुशी मे हि दीपावली ( Deepawali ) का त्योहार मनाया जाता है।

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दीपावली कब मनाई जाती है?

      Friends Diwali Festival प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है । कहा जाता है कि जब भगवान अयोध्या पधारे थे, तब अमावस्या थी और दीपकों की रोशनी से अमावस्या की रात्रि को पूर्णिमा की रात्रि बना दिया ।
विशेष :- दोस्तो इस बार की दीपावली  कार्तिक मास की अमावस्या को रविवार 27 अक्टूबर, 2019  को मनाई जाएगी ।

दीपावली कैसे मनाते है?

     दिवाली को बड़े ही शानदार तरीके से Celebrate किया जाता है।  दिवाली की रात्रि ( अमावस्या की रात्रि ) को सभी लोग अपने घरो को दीपकों की रोशनी से सजाते है। 
युवा इस दिन पटाखे उर आतिशबाजी करके श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी मनाते है। इस दिन विशेष पूजा पाठ भी किया जाता है।



दीपावली का महत्व

      Friends दिवाली का पर्व अपने आप मे एक प्रेरणादायी त्यौहार है । जब दीपक की रोशनी से सारा आसमान जगमगाता है तो मन मे एक नवीन प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है जो की Body और Mind दोनो के लिए Useful होती है।

दिवाली के दिन सभी भाई लोग आपस मे मिलते है जिससे भाईचारा बढता है ।
दीपावली धर्म पर चलने का तथा अपने वचन को निभाने का हौसला बुलंद करती है ।

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दीपावली पर मनाए जाने वाले त्यौहार


      दोस्तो Diwali तो कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है । लेकिन इससे Related ओर भी त्यौहार मनाए जाते है - 

  नवरात्रा
          दिवाली से 20 दिन पहले अश्विन शुक्ल पक्ष एकम् से नवम तक देवी के नौ रूपो की पूजा की जाती है। 

   विजयादशमी
          अश्विन शुक्ल पक्ष दसम् को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है । इस दिन श्रीराम ने रावण का वध किया था इसलिए इस दिन रावण, कुम्भकर्ण और इन्द्रजीत के पुतले जलाए जाते है । 

    धनतेरस
        इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है । यह त्यौहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की 13  को मनाया जाता है। इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है ।

     रूप चतुर्दशी
   यह त्यौहार दिवाली से एक दिन पहले कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की 14 को मनाया जाता है। इस को छोटी दीपावली भी कहते है ।
इस दिन स्त्रियाँ सुबह जल्दी उठकर स्नान करती है और सुन्दर रूप की कामना करती है ।

 गोवर्धन पूजा
   जब इन्द्र देव ने गोकुलवासियों से नाराज होकर उन्हे सबक सीखाने के लिए जोरदार बारिश की तब श्री कृष्ण ने अपनी एक अगुंली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर गोकुल के लोगो की रक्षा की थी । इसलिए इस दिन को गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।
यह पूजा कार्तिक शुक्ला एकम् को की जाती है । 


    भैयादूज
         भाई - बहन का त्यौहारी भैयादूज कार्तिक शुक्ला द्वितीया को मनाया जाता है ।
   
अब दे अपने दोस्तों को दीपावली की बधाई कुछ इस अंदाज में...
   Happy Diwali Wish SMS Quotes
    
दोस्तो आपको हमारा यह " दीपावली पर निबंध " Post कैसी लगी । यदि आपके पास भी दीपावली से जुडी कोई कहानी हो तो हमारे साथ comments box मे जरूर share करे ।


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वनशाला शिविर के अनुभव | open air कैसा रहा?

vanshala shivir kaesa raha

दोस्तों पिछले दिनों हमारी college का वनशाला कैंप का हुआ. यह कैंप वैसे तो बी.एड के लिए है लेकिन composite unit होने के कारण हमे भी साथ जाने का मौका मिला. आप मेसे से बहुत से लोग जानते ही होंगे की मै विद्या भवन से BSTC कर रहा हूँ. इसी कारण हम सभी student teachers open air के लिए udaipur से लगभग 25 किलोमीटर दूर काया नामक गाँव में  गये.
हर कैंप की तरह इस कैंप के भी कुछ अलग और नये अनुभव मिले , जो आज में आप लोगो के साथ share करने जा रहा हूँ...

दोस्तों वनशाला का आयोजन 3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2018 के मध्य रखा गया. इस कैंप का मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट टीचर्स को सामाजिक जीवन से जोड़ना और उसको समझने की क्षमता का विकास करना था. समाज को समझ कर तथा अपने पर्यावरण को जान कर उसका उपयोग अपने स्टूडेंट्स को पढ़ने में कर सके जिससे उनका शिक्षण प्रभावी हो सके.

इन चार दिवसीय शिविर के प्रत्येक कार्यक्रम से कुछ न कुछ नया जानने को मिला और हमने बहुत सी नई चीजों को जाना. शिविर की दिनचर्या की बात करूं तो सुबह 6 बजे से प्रारम्भ होकर रात्रि लगभग 11 बजे तक अविरल चलती रहती थी.  पुरे दिन में student teachers आपसे में मिलजुलकर रहते और एक दुसरे की मदद से कार्य को पूर्ण करते थे.

students नहीं करे यह काम

शिविर के मुख्य कार्यक्रम

 योग और प्रार्थना
 शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग व प्रार्थना बहुत जरुरी है. इसी लिए कैंप में daily 7:00 बजे योग और प्रार्थना होती थी. जिससे सभी के दिन की शुरुआत एक अच्छे माहौल में होती थी.

लेआउट बनाना
  यह एक दिलस्प प्रतियोगिता होती थी जिसमे सभी सोसाइटी अपने पास मोजूद सामान से कुछ disign बनाती थी. जिसमे सभी लोग अलग अलग अलग टॉपिक्स पर लेआउट बनाते.



layout


मौन वेला
 कैंप का यदि सबसे अच्छा कोई कार्यक्रम का पूछा जाए तो मेरा जवाब 'मौन वेला' ही होगा.  क्योंकि पहाड़ियों के बीच शांत वातावरण में अस्त होते हुए सूरज को देखना और मंद  मंद बजते music के साथ ध्यान लगाना , एक योगी की अनुभूति करवाता था.
यह अलग बात है की कुछ खुरापाती साथियों की वजह से हम इसका पूर्ण आनन्द नहीं ले पाये क्योंकि उनसे बोले बिना रहा ही नहीं जाता था.

कैंप फायर और सांस्कृतिक कार्यक्रम
  जब दिन भर के कामों में थक जाते तो इन दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से enjoy करते थे. वैसे कैंप फायर का कार्यक्रम तो अच्छा रहा लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में हम लोगो ने पूर्ण रूप से भाग नहीं लिया.
आप जानते ही है जहाँ पर ईगो आपस में टकराने लगे तो वहां शांति रखना बहुत मुश्किल होता है. एसा ही कुछ हमारे साथ भी हुआ. आत्मसम्मान और स्टाफ की बेरुखी की वजह से भगत सिंह के भक्तों ने गाँधीजी की राह  पर चलते हुए असहयोग   आन्दोलन का सहर लिया . जिसमे सांस्कृतिक कार्यक्रम में गये जरुर पर वहां पर शांति से बैठे रहे बिना किसी हावभाव के सभी को ignore करते रहे.

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दोस्ती की कहानी

जागरूकता रैली
 कैंप के तीसरे दिन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया जिसमे सभी सोसाइटी ने भाग लिया. रैली के अनुभव भी बहुत खाश रहे. रैली दोपहर के 3:00 बजे निकली गयी और इस टाइम बहुत धुप रहती है. जिससे लोगो के घरों से बाहर आने की सम्भवना कम थी. जब गाँव में पहुंचे तो वोही हुआ जिसका अंदेशा था.

रैली के नारों को सुनने वाला और नुक्कड़ नाटक को देखने वाला कोई नहीं था. यतिन जी सर ने बहुत मेहनत करके और लोगो के घर में जा जाकर लोगो को नाटक देखने के लिए बुलाया . इस सब के बावजूद केवल  3-4 महिलाऐं , 2 पुरुष और कुछ बच्चे ही आये. बच्चो को भी चाकलेट दी तब जाकर आये.
फिर सभी ने उनके सामने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया और पुन: अपने कैंप स्थल की और आ गये.

open year
प्रिंसिपल मेम
सर्वे कार्य के चार्ट


शिविर के अविस्मरणीय पल


इन चार दिन के शिविर में बहुत से ऐसे पल आये जो हमे तो याद रहेंगे ही साथ ही पुरे स्टाफ को भी ताउम्र याद रहेंगे. जब भी वनशाला कैंप की बात होगी इसी कैंप का नाम जरुर जोड़ा जाएगा.

BSTC के अधिकतर स्टूडेंट्स मारवाड़ से है और आप जानते ही होंगे की हम लोगो पाताल फोड़ कर पानी पीते है तो हमारी वाणी में लहजा भी उसी तरह का आता है जो बहुत से लोगो को पसंद नहीं होता है. ऐसा ही यहाँ भी हुआ हमारी सीधी बात भी लोगो को बुरी लगने लगी और हर समय की शिकायतों से तंग आकर हमने भी एक्शन लेने शुरू कर दिए जिससे बहुत हंगामा हुआ.

camp kaesa raha
master mind


छाछ घोटाला 
   आपने 2G , चारा घोटाला, कोयला घोटाला का नाम तो सुना होगा लेकिन यहाँ जो हुआ वो विश्व के इतिहास में पहली बार हुआ - "छाछ घोटाला."
 हमारे कुछ साथियों ने दोपहर के भोजन के समय छाछ की कमी के कारण एक जग छाछ अपने पास रख ली और कॉलेज स्टाफ के मांगने पर नहीं होने का बहाना बना दिया. और इसी कारण उन लोगो को तुरंत लाइन हाजिर करके लगभग तीन घंटे class लगाई गई .
जो की अपने आप में एक अनोखा मामला था जो पुरे कैंप में चर्चा का विषय रहा.



रात को तीन बजे आपात मीटिंग
       5 व 6 तारीख की मध्य रात्रि को जब सब लोग सो गये तो असहयोग आन्दोलन करने वाले युवाओं के मन में आया की क्यों न डांस किया जाए? फिर क्या था आनन फानन में अपने म्यूजिक सिस्टम को ऑन किया और शुरू हो गये .
कोई मंजे हुए डांसर तो थे नहीं की शांति से नृत्य करते सभी लोग शिवजी के गणों की तरह उछल कूद करते हुए जोर जोर से गीत गाने लगे .

गीत के बोल थे - " बन्नासा दूध पियो दारू छोड़ों सा ...", "आगे रे आगे कोटल घोड़लों..." समेत कई राजस्थानी गीतों पर भांगड़ा करने लगे. यहाँ तक तो ठीक था लेकिन फिर कुछ खुरापातियों ने अजीब अजीब तरह से आवाजे निकालनी शुरू कर दी जिससे शांत रात्रि भयानक होने लगी. ऐसा लगने लगा जैसे भुत जाग गये है ओए नृत्य कर रहे है.

इस तरह के महौल को सम्भालना किसी एक के बस की बात नहीं थी इसलिए आधी रात को पूरा स्टाफ उस स्थल पर आ गया और हम लोगो को रात्रि के 3 बजे मीटिंग में बुलाया और घटना पर गर्मागर्म बहस भी हुई पर अंत में वो ही हुआ जो होना था हमने माफ़ी मांग ली और उनका गुस्सा शांत हो गया.
इस घटना के 17 महारथियों के स्वर्ण पत्र पर हस्ताक्षर करवाएं गये की आगे से ऐसा नहीं होगा .
कुल मिलाकर कैंप में माहौल बनाने में हमने कोई कमी नहीं छोड़ी, 

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कैंप में हमने क्या सीखा ?

 शिविर के अनुभव तो खट्टे मीठे रहे लेकिन इस कैंप में हमने बहुत सी बातें जो कहानियों में या अख़बार में  पढ़ते थे उन्हें हकीकत में होते हुए देखा और अनुभव किया.

माहौल का गलत फायदा
  जब हमने रात में डांस करने का सोचा तब हमारे दिमाग में एसा कुछ भी नहीं था की साथी लोगो को परेशान किया जाए और उन्हें तकलीफ दी जाए. परन्तु कुछ छात्रों की शरारत की वजह से यह पूरा मामला हुआ और जो इस शरारत में शामिल थे वो तो निकल गये और सीधे सीधे गाने वाले पकड़े गये.
ऐसा बहुत सी जगह होता है जब बहुत सी  भीड़ होती है तो कुछ नापाक लोग उसका गलत फायदा उठाते है इसके लिए हमे पहले से सावधान रहना चाहिए.

हर मामले का हल बातचीत  से सम्भव है.
बेवजह मामले को टूल न दे और बिना फिक्स उद्देश्य के कोई माहौल न बनाए.



कैंप की सबसे अच्छी बात यह रही की अलग अलग  कोर्स  ( B.ed और BSTC ) होने के बावजूद स्टूडेंट teachers के मध्य किसी भी बात को लेकर अनबन नहीं हुई. इतना पूरा महौल होने के बावजूद दोनो के बीच स्नेह बना रहा.

6 अप्रैल को कैंप का समापन समारोह आयोजन किया गया और अपनी खट्टी मीठी यादों के साथ हम लोग अपने अपने घरों की तरफ रवाना हो गये.

इन यादों को लेकर मुझे अपनी ही चार लाइन याद आती है -
  कुछ कही , कुछ अनकही बातें
संजोए रखी है यादों के संदूक में .
आना कभी, मिलकर खोलेंगे यादों का संदूक
बैठकर बतियाएंगे
(वोही)
कुछ कही, कुछ अनकही बातें.

दोस्तों आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी आप comment box में अपने विचार जरुर रखे.

essay on child labour in hindi बालश्रम पर निबंध

speech on child labour in hindi


बालश्रम society के लिए एक अभिशाप है. child labour गाँव-गाँव और नगर-नगर पैर पसारे हुए है. इसकी वजह से बहुत से children की life बर्बाद हो रही है. बालश्रम के कारण बच्चों का बचपन खत्म होता जा रहा है. india में भी child labour एक most problem है. 


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बालश्रम क्या है? what is child labour ?

     " एक निश्चित age से कम age के बच्चों से कार्य करवाना बालश्रम कहलाता है. "
जब समाज में खेलने और पढने की उम्र वाले children hard work करते है, socity के लिए इससे बड़ी समस्या क्या हो सकती है?  child labour के कारण maximum children की primary education भी पूर्ण नहीं हो पति है और वे अनपढ़ रह जाते है. 


child labour information in hindi

child labour essay


गोपालदास 'नीरज' ने लिखा है -
  
           "जिनको जाना था यहाँ पढ़ने को स्कूल,
            जूतों पर पॉलिश करें वो भविष्य के फूल.."



child labour मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है. India में 14 वर्ष से कम बच्चों से काम करवाना child labour के अंदर आता है. childrens को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास करने का हक है लेकिन child labour के कारण वे school, games और प्यार-स्नेह से दूर हो जाते है.

बच्चों के साथ गलत तरीके से बात की जाती है और उन्हें बात बात पर फटकारा जाता है जिससे बाल मन कुंठित हो जाता है जिसका effect उसकी life पर पड़ता है.

यह भी सच है की बच्चे के माता-पिता भी उन्हें बालश्रम करने के लिए प्रेरित करते है लेकिन यह उनकी भी मजबूरी होती है क्योंकि भूख सबसे बड़ी चीज है और यह कुछ का कुछ करवा देती है. 


बालश्रम के कारण

     child labour को बढ़ावा मिलने के पीछे बहुत से कारक है. company मालिकों को कम money में मजदूर मिल जाते है. family की आर्थिक हालत को सुधारने में कुछ मदद मिल जाती है. हम सभी देखते है कि कड़ाके की ठंड या शरीर को जला देने वाली में भी children काम करते है. इन कठिन हालतों में भी बच्चो के काम करने के कई कारण है-
  • आर्थिक कमजोरी
  • परिवार में education की कमी
  • जागरूकता की कमी
  • Company मालिकों का स्वार्थ
  • Govt. level पर सही से नियम लागु नहीं करना.


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बालश्रम के दुष्परिणाम

  •    child labour children की life बर्बाद कर देता है. इसके कारण से बहुत से बच्चे जिन्दगी को enjoy नहीं कर पाते है.  चाइल्ड लेबर से बच्चे अपनी school level तक की भी education पूरी नहीं कर पाते है. 


  •  ढाबों पर, hotel में, घरों में काम करने के लिए रखे गये चिल्ड्रेन के साथ सही से बात नहीं की जाती है उन्हें मारा पिता जाता है जिससे वे हीन भावना से ग्रसित हो जाते है. और उनका जीवन बर्बाद होता रहता है.

  •  कई बच्चे प्लास्टिक बीनने का या कचरा बीनने का काम करते है. इस काम में वे long time तक कूड़े के पास रहते है जिससे उन्हें कई प्रकार की बीमारियाँ भी हो जाती है और money के अभाव में उनका ईलाज भी नहीं हो पाता है.

  •  कई बच्चे जोखिम वाली जगह जैसे - chemical के कारखाने, glass company में etc. पर काम करते है इससे उनकी body पर  chemical के negative effects पड़ते है. 

  •  बच्चे जब काम करते है और इन हालात से गुजरते है तब इनका दिल भी रोता है और मन भी लेकिन चंद पैसों के लिए 10-12 hours तक काम करना पड़ता है. 


child labour in india essay

   बालश्रम रोकने के उपाय

  दोस्तों child labour एक बहुत बड़ी समस्या है और यह एक ऐसी समस्या है जिसका सामना हम सब मिल कर ही कर सकते है. किसी भी बच्चे के बचपन को छिनने का हमारा कोई हक नहीं है यदि हम ऐसा करते है तो इससे बड़ा कोई पाप नहीं है.
  • अपने बच्चों से ऐसे काम न करवाएं जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की हानि हो.
  • यदि आप किसी company मालिक है या ठेकेदार है तो किसी भी बच्चे को काम पर नहीं रखे.
  • अपने घर या आसपास child labour होता देखो तो उसे ऐसा न करने के लिए समझाएं न माने तो police को information दे.
  • education को बढ़ावा दे.
  • गरीब और दीन लोगो की मदद करे.


child labour act in india

  india में 14 वर्ष से कम age के बच्चे से काम करवाना क़ानूनी जुर्म है. संविधान में भी child labour को लेकर कई प्रावधान है.
  1.  किसी भी 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को किसी जोखिम वाले काम पर नहीं रखा जाएगा.
  2. बच्चों को शोषण से बचाया जाएगा.(धारा 39.1)
  3. 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क education दिया जाएगा.
  4. भारत सरकार ने children को जोखिम वाले जगह पर रोजगार देने पर प्रतिबन्ध लगाने वाला बाल-श्रम अधिनियम, 1986 बनाया जो ऐसा पहला विस्तृत कानून था.

final word
 सरकारी और व्यक्तिगत लेवल पर काम करने से ही child labour पर रोक सम्भव है. सरकार से सजा पाने से सभी सुधर जाते तो आज देश में अपराध नहीं होता. समाज में फैले इस जाल को यदि तोडना है तो हमे ही आगे आना होगा. 


छोटे-छोटे मासूम बच्चे जिनके face को देखकर यमराज का भी दिल पिघल जाए ऐसे बच्चो से ढाबो और hotels में काम करवाया जाता है. और इस तरह उन बच्चो का बचपन काम में ही गुजर जाता है.
अंतिम में में यही कहूँगा 


  अपने घरों और दुकान में children को काम पर नहीं रखे और यदि रखे तो उन्हें उचित सम्मान जरुर दे.

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आरक्षण व्यवस्था पर निबंध | essay on reservation policy in hindi

आरक्षण आज देश का सबसे ज्वलंत मुद्दा है । आरक्षण के लिए देश मे जगह-जगह हड़ताल, आंदोलन आदि हो रहे है । आज की पीढ़ी चाहती है कि आरक्षण पर बहस हो ।

आरक्षण क्या है    आरक्षण एक ऐसी व्यवस्था है जिसमे योग्य व्यक्ति के स्थान पर उससे कम योग्य को उस पद पर बैठाना । क्योंकि कम योग्य व्यक्ति की जाति आरक्षित वर्ग मे आती है । वर्तमान स्वरूप मे ऐसा ही है ।

आज हम "आरक्षण पर निबंध" मे इस बात का जिक्र करेंगे कि आरक्षण की देश को वास्तव मे आवश्यकता है या नही । आवश्यकता है तो आरक्षण की व्यवस्था क्या होनी चाहिए ।



आरक्षण के स्वरूप पर निबंध


आरक्षण पर निबंध | essay on reservation policy in hindi

आरक्षण के लिए लोगो द्वारा पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब हमारी राय मे ।

  • आरक्षण  होना चाहिए या नही ।
  • आरक्षण किस आधार पर हो ।
  • आरक्षण किस लेवल तक हो ।
हमारे देश के संविधान के अनुसार आरक्षण एक संविधान द्वारा मान्य व्यवस्था है, इसलिए हम इसका सम्मान करते है लेकिन संविधान ने हमे बोलने की आजादी दी है इसलिए आरक्षण के मुद्दे पर हम अपने विचार रख सकते है । क्योंकि यह देश के विकास और भविष्य से जुड़ा हुआ है इसलिए आरक्षण पर विचार करना बहुत जरूरी है ।

 ● आरक्षण होना चाहिए या नही  आरक्षण का उद्देश्य उन लोगो को ऊपर उठाना है जो की पिछड़े तबके से है । और जब आरक्षण लागू किया  गया था तब हालात कुछ अलग थे और अब हालात कुछ अलग है । 
आज भी कुछ लोगो को आरक्षण की आवश्यकता है । इसलिए आरक्षण होना चाहिए ।लेकिन कुछ अलग नियम और व्यवस्था के साथ होना चाहिए ।  आरक्षण की वर्तमान स्थिति है उससे वास्तव मे जरूरतमंद को फायदा नही मिलता है ।


● आरक्षण किस आधार पर हो       आरक्षण के आधार को लेकर सभी लोगो के अलग अलग मत है । वर्तमान मे आरक्षण जाति के आधार पर है । कुछ जगह पर धर्म के आधार पर भी आरक्षण है । 
 जातिगत आरक्षण मे लोगो को आरक्षण का सही लाभ नही मिलता है । वर्तमान मे आरक्षण के लिए अलग अलग कैटेगरी बनाई गई है जैसे ओबीसी , एससी, एसटी और एसबीसी ।
एक कैटिगरी मे पांच पांच या उससे ज्यादा जाति है । और एक बात हम सब जानते है कि इनके कैटिगरी मे एक या दो जातियाँ ही आरक्षण का लाभ उठाती है । बाकी की हालात तो अब भी वैसी की वैसी ही है ।
आर्थिक आधार पर हो आरक्षण      यदि सरकार आरक्षण देना चाहती है तो जाति के आधार पर या धर्म के आधार पर आरक्षण न देकर आर्थिक आधार पर आरक्षण देना चाहिए । 
"क्योंकि गरीबी कोई जाति या मजहब देखकर नही आती है । "

आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए सरकार को एक सर्वे करना चाहिए और लोगो की आर्थिक स्थिति को पता करनी चाहिए । फिर एक आय निश्चित कर देनी चाहिए की इस रूपये से कम आय वाले को आरक्षण मिलेगा । 

एक  और महत्वपूर्ण बात आरक्षण के लिए सर्व प्रति दस वर्ष मे होना चाहिए ।जैसे जनगणना होती है । क्योंकि दस वर्ष मे व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदल सकती है ।

आरक्षण किस लेवल तक हो          जातिगत आरक्षण तो बिल्कुल ही समाप्त कर देना चाहिए और आर्थिक आधार पर आरक्षण कुछ जगह या कुछ सेवा मे होना चाहिए ।


   ●  लोगो के लाइफ से जुड़ी सेवाएँ जैसे सेना , मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि जगह पर आरक्षण नही होना चाहिए ।
    ● देश का न्यायालय सर्वोच्च संस्था है इसलिए न्याय व्यवस्था मे आरक्षण नही होना चाहिए ।
    ● किसी एक व्यक्ति को अपनी लाइफ मे एक बार ही आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए । एक बार आरक्षण का लाभ उठा कर वो सक्षम बन गया है । अब उसे मेहनत से काम करना चाहिए ।

उपसंहार
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    आरक्षण देने की बात सरकार करती है इसकी जगह यदि वो यह कहे कि हम सभी को उच्च शिक्षा मुफ्त मे मुवैया करवाएंगे या सस्ते मे उपलब्ध करवाएंगे तो गरीब लोगो को फायदा होगा ।
उच्च शिक्षा के लिए किताब 📚 खरीद पाना जिसके बस मे नही है वो आरक्षण का कैसे लाभ उठाएगा ।
आरक्षण रूपी बैसाखी का सहारा देने की जगह उसको सक्षम बनाना चाहिए ।
अमेरिका जैसे देश मे भी आरक्षण जैसी व्यवस्था को बंद कर दिया गया है ।

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