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कविता - वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.....hindi poem openair vidya bhawan udaipur


तपते रेगिस्तान में
कामणगारी लू से अठखेली करती
खड़ी है खेजड़ियाँ 
लम्बे पाँवो के सहारे,
वैसे ही 
दीपक सा टिमटिमा रहा हूँ 
मैं भी 
यादों के तेल के सहारे....

college life जब खत्म होती है और हम सब मुसाफ़िर बन अपनी मंजिल की खोज में निकल पड़ते है, अनजानी राहों पर...
उन राहों पर चलते-चलते जब पुराने साथी मिलते है तो बीते दिनों की यादें जहन में आ ही जाती है... उन यादों में छुपी होती है कुछ ऐसी कहानियाँ जो दिल के बहुत करीब होती है..

ऐसी एक कहानी जो मेरे और मेरे साथियों के दिलों-दिमाग में छाई हुई है , जब भी मिलते तब उस दिन का जिक्र जरुर होता है...
आज आपको उस दिन या यों कहे की उस रात की बातें बतानी है जिस समय हमें लोगों की सही पहचान हुई थी...

इस कविता को पढने से पहले इस लेख को पढ़ लें...

वनशाला शिविर के अनुभव


वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.....

एक रात की बात तुम्हें बतानी है,
वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.
जो उन्होंने कहा वो बताना है,
जो हमने सहा वो बताना है.
जहन में अब भी है वो दिन,
रात के बजे थे यही कोई तीन.
प्राची से नया दिन निकलने वाला था,
किन्तु, यहाँ अपना सूरज डूबने वाला था.
थी सब जगह हिमालय सी शांति छाई,
कुछ वक्त पहले यहाँ आंधी थी आई.
उस आंधी की बात बतानी है,
वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.

बन शिव के गण हमने तांडव किया,
दो दिन से थे बंधे, आज खुल के आनन्द लिया.
इसी बात पर उनकी हम से ठन गई,
साहिबाओं  की भौंहे हम पर तन गई.
नालायक, बदचलन, क्या-क्या नहीं कहा;
हमसे पूछो, हमने क्या-क्या नहीं सहा.
जो हमने भोगे, उन दुखों की कहानी है,
वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.

ऐसे-वैसे भी हमें भगवत् गीता सुनाने लगे,
बीन पेंदे के लोटे, हमें बदचलन बताने लगे.
थे हम भी अचल,
अपनी बात पर अटल.
किन्तु कुछ साथी दगा दे , अपनी औकात दिखा बैठे;
बीच भंवर में छोड़, अपनी जात दिखा बैठे.
कोई साथ होकर भी पीठ दिखा गया,
कोई साथ न होकर  साथ आ गया.
हमें मिले उस धोखे की कहानी है,
वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.

थे वो हमें निकालने वाले,
लगा हम है डूबने वाले.
तभी किसी का साथ मिला,
डूबते को तिनका नहीं, एक हाथ मिला.
जो कभी हमें लगती थी चण्डिका,
आज वो हमें लगी अपनी दादी माँ.
क्लास में गोलू गाथा सुनाती थी,
कभी-कभी पंजाबी में डांट पिलाती थी.
आज वो सबसे लड़ गई,
हमें बचाने अकेली भीड़ गई.
उस दादी मां की बातें बतानी है,
वो कहानी आज तुम्हें सुनानी है.

hindi-poem

 
फिर,
हमने देखा  मैडम की आँखे लायी  पानी थी,
बस उसी वक्त हुई हमें  ग्लानि थी.
बात न बढ़े ये हमने ठान ली,
न चाहते हुए भी हमने भूल मान ली.
था हमें मैडम पर विश्वास,
उन्होंने टूटने नहीं दी आस.
उन्होंने भी दे दी हँसते-हँसते माफ़ी,
अपने लिए बस इतना ही था काफ़ी.

ये उस रात की कहानी है,
वो कहानी आज तुम्हे सुनानी है...
उस रात की हकीकत तुम्हें बतानी है...
viram singh poem

   विरम सिंह सुरावा 

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ये मंजिल कैसे मिलेगी? Best motivational poem in hindi

युवाओ के लिए प्रेरणादायी कविता

ये मंजिल कैसे मिलेगी?

motivational poem


ये मंद मंद गति क्यों?
ये अलसाई सी अंगड़ाई क्यों?
किसकी आस में तुम बैठे हो,
राह किसकी तुम देखते हो।

क्यों हवा में महल बनाते हो?
क्यों सपनों मे ही खोते हो?
हाथ मलोगे, जब   सुबह होगी,
क्यों जीवन ऐसे गंवाते हो?

शल्य बने बैठे है जग में,
रथ धंसा देंगे जमीं में।
बना निहत्था तुझे,
मस्तक कौन्तेय से कटवा देंगे।

जब बाण चढ़े थे गांडीव पर,
तब हक पांडवो को मिला था।
बढा हाथ जब धनु को,
तब सिन्धु कदमों  में पड़ा था।

न पाँव जमीं पर न हाथ धनुष पर,
ये विजय तुम्हे कैसे मिलेगी?
मांगे न भीख मिलती,
ये मंजिल तुम्हे कैसे मिलेगी?

viram singh poem





विरम सिंह सुरावा


ओर कविताएँ 




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कविता - महिलाओ से | Women poem

महिलाओ के लिए प्रेरणादायी कविता

Women-poem


हर दिन सड़को पर मचली जाती हो ।
सिर्फ सिसकियाँ भर रह जाती हो ।।
फिर भी कहती अबला नही, हम है सबला ।
क्यों ओढ रखा है कायरता पर वीरता का चौला ।।


तुम्ही लक्ष्मी बाई, तुम्ही हो कर्मावती ।
तुम्ही महारानी पद्मिनी ,तुम्ही हो हाड़ी रानी ।।
क्यो सहती हो अन्याय को ।
क्यो मचली जाती हो नामर्दो के हाथो ।।


चुप बैठे ना काम चलेगा, कर्मावती बनना होगा ।
महिषासुरो का बढ गया है अन्याय, दुर्गा बनना होगा ।
आँखो मे वो ज्वाला जगानी होगी ।
पापियों के नाश  के लिए , तलवार उठानी होगी ।।


उतार फेको यह दिखावे का चौला ।
तोड डालो सामने उठती हर अँगुली ।।
फोड़  डालो हर वो  आँख ।
जिसमे हो वासना की आग ।।


           विरम सिंह

हिन्दी कविताएँ

जब सीमा पर जवान शहीद हुआ होगा hindi Patriot Poem independence day 2018



कविता 




उस दिन आसमां भी बिलखा होगा,
जब सीमा पर जवान शहीद हुआ होगा ।


अस्ताचल को जाता भानू भी ठिठका होगा,
जब डोली मे बैठी बहना को शहीद भाई का मुँह दिखाया होगा ।।


आँगन मे बैठी बुढ़ी माँ का आँचल भी दुध से भीग गया होगा ,
जब शहीद जवान बेटे की देह को सीने से लगाया होगा ।।

काल भी अपने किए खोटे काम पर पछताया होगा ,
जब मेंहदी वाले हाथो ने अपनी माँग को मिटाया होगा ।


यमलोक में यमदेव भी चुपके चुपके बिलखे होंगे ,
जब दुध पीते बेटे ने शहीद पिता को अग्नि दी होंगी ।


उस दिन आसमां भी बिलखा होगा , 
जब सीमा पर जवान शहीद हुआ होगा ।

विरम सिंह सुरावा





वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै hindi best poem


वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


चन्द्रसेन राठौड़

मायड़ थारों वो पुत कठै
वो मरूधरा रो लाल कठै
वो मालदेवजी रो सपूत कठै
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


मायड़ थारों वो पूत कठै...2

आजादी  खातिर जंगल जंगल घुमनीयों
वो आजादी रो दिवानो कठै ।
अकबर  री आँख रो काँटो
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै....2

वो जुझेयों घणो अकबर री सेना रे आगे,
मान बचावण मरूधरा रो 
वो जोधाने रो शेर कठै ।
भाद्राजून और सिवाणा री धरा पर ,
अकबर ने  सबक सिखावण वालो
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै 
वो मरूधरा रो लाल कठै ।


नागौर दरबार मे रजपूती री आन राखनियों
वो मारवाड़ रो सूरज कठै ।
स्वाभिमान री अलख जगान जगानियों
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै 
वो मरूधरा रो लाल कठै 
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।

       विरम सिंह सुरावा


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